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Jamat Razae Mustafa Merta City Ke Mansoobo'n Se Shaher Ki Sunniyat Ko Bahut Faeyda Pahonche Ga.

Mufti Shahzad Alam Misbahi
Mufti Shahzad Alam Misbahi Ustaz wo Mufti, Jamiatur Raza, Bareilly Sharif

Har Shaher Me Maslake Ala Hazrat Ki Raushni Me Deeni Taleem Waqt Ki Ahem Zarurat Hai.

Abdur Rahman Tabani
Abdur Rahman Tabani Jamat Raza e Mustafa, Maharashtra

Jamat Raza e Mustafa Merta, Mission e Tajushshariya Ka Sahi Kaam Kar Rahi Hai.

Muhammad Rafi Tahseeni
Muhammad Rafi Tahseeni Radde Sulhe Kulliyat Mission, Bareilly Sharif

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हदीसे पाक

नबी ए अकरम सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि इल्मे दीन का सीखना हर मुस्लमान पर फ़र्ज़ है.

कितना इल्मे दीन सीखना फर्ज़ है?

उलमा फरमाते हैं के हर मुस्लमान आकिल व बालिग, मर्द व औरत पर उसकी मौजूदा हालत (ज़रूरत) के मुताबिक दीन के मसाइल का सीखना फ़र्जे ऐन है.

मस्जिद में नमाज़ पढने की फ़ज़ीलत

आदमी का मस्जिद में जमात के साथ नमाज़ पढना, घर में या बाज़ार में अकेले नामज़ पढने से २५ दर्जे ज़ाइद (अफज़ल) है.
अल्लाह तआला का प्यारा बन्ने के लिए, दरजात की तरक्की के लिए, जन्नत में दाखले के लिए, जहन्नम से आज़ादी के लिए, मुनाफिकत की निशानी से बचने के लिए, शैतान से हिफाज़त और अल्लाह तआला की बे-शुमार रहमतों का मुसतहिक़ बन्ने के लिए नमाज़े बा-जमात की पाबन्दी कीजिये, खुद भी मस्जिद आइये और अपने साथ दूसरों को भी मस्जिद लाइये.

आला-हज़रत के वालिद का इरशाद

सरकार आला-हज़रत के वालिद हज़रत अल्लामा मुफ़्ती नक़ी अली खां रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं कि जो लोग बिना किसी वजह या मजबूरी के नमाज़ छोड़ देते हैं और खुदा व रसूल से असलन नहीं शरमाते, ऐसे लोग क़यामत के दिन अगर एक नमाज़ के बदले पूरी दुनिया देना चाहें गे तो कुबूल न होगी और अगर १००० बरस रोएँ गे तो भी नजात न मिले गी.
(अनवारे जमाले मुस्तफा, सफा: ३४४)

एक वक़्त की नमाज़ छोड़ने का अनजाम

नबी ए अकरम सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि जिस ने जान बूझ क्र एक वक़्त की नमाज़ छोड़ी तो उसका नाम जहन्नम के उस दरवाज़े पर लिख दिया जाता है जिस से वह जहन्नम में दाखिल होगा.